
चंदा मामा मुझे बताना।
तेरा चोला है सिलवाना।।
कितना कपड़ा बोलो लाऊँ।
नाप तुम्हारा समझ न पाऊँ।।
लुप्त कभी बिल्कुल हो जाते।
रात कहो फिर कहाँ बिताते।।
पूनम में सजधज कर आते।
राज कभी हम समझ न पाते।।
दादी नानी समझ न पाई।
कितनी अपनी नींद उड़ाई।।
नाप सही जब नहीं तुम्हारा।
दोष बताओ कहाँ हमारा।।
यान बड़ा लेकर आऊँगा।
चोला तेरा तब लाऊँगा।।
नाप सही मामा बतलाना।
वादा इतना भूल न जाना।।
हिम्मत चौरड़िया प्रज्ञा
कोलकाता, लाडनूँ




