साहित्य

रासा छंद

हिम्मत चौरड़िया

चंदा मामा मुझे बताना।

तेरा चोला है सिलवाना।।

कितना कपड़ा बोलो लाऊँ।

नाप तुम्हारा समझ न पाऊँ।।

 

लुप्त कभी बिल्कुल हो जाते।

रात कहो फिर कहाँ बिताते।।

पूनम में सजधज कर आते।

राज कभी हम समझ न पाते।।

 

दादी नानी समझ न पाई।

कितनी अपनी नींद उड़ाई।।

नाप सही जब नहीं तुम्हारा।

दोष बताओ कहाँ हमारा।।

 

यान बड़ा लेकर आऊँगा।

चोला तेरा तब लाऊँगा।।

नाप सही मामा बतलाना।

वादा इतना भूल न जाना।।

हिम्मत चौरड़िया प्रज्ञा

कोलकाता, लाडनूँ

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!