
।इस धरा का,इस धरा पर,धरा रह जाना है।
।। विधा।। गीत।।
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मुठ्ठी बांधे जन्म लिया और हाथ पसारे जाना है।
इस धरा का इस धरा पर धरा रह जाना है।।
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सफल या असफल रुको नहीं कि प्रयास करते रहो।
रोज कुछ न कुछ प्रगति की राह में बस ढलते रहो।।
तेरा धन सब कुछ इसी धरती पर पड़ा रह जाना है।
इस धरा का इस धरा पर धरा रह जाना है।।
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कर्मों का किया ब्याज सहित लौट वापिस आता है।
मनुष्य अपनी करनी का फल इसी जन्म में पाता है।।
किस्मत लिखा नहीं कर्मों के किए ने फल लाना है।
इस धरा का इस धरा पर धरा रह जाना है।।
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रिश्ते और दोस्ती में सदा सम्मान देने का प्रयास करें।
समझें लोगों को और सच पर ही सदा विश्वास करें।।
जो किए भले काम बस उनको ही याद आना है।
इस धरा का इस धरा पर धरा रह जाना है।।
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रचयिता।।एस के कपूर”श्री हंस”
बरेली।।
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