साहित्य

विश्व पृथ्वी दिवस : क्या होगा तेरा इंसान?

श्रीमती लक्ष्मी चौहान 'रोशनी'

विश्व पृथ्वी दिवस हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य पृथ्वी और उसके पर्यावरण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। यह दिवस पहली बार 1970 में मनाया गया था, जब अमेरिकी सीनेटर गेलार्ड नेल्सन के आवाहन पर 20 मिलियन से अधिक लोगों ने पर्यावरण क्षरण के विरोध में प्रदर्शन कर पर्यावरणीय मुद्दों पर ध्यान दिया था। तब से यह दिन दुनिया भर में पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ाने और पृथ्वी की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण दिवस बन गया।
विश्व पृथ्वी दिवस केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह पृथ्वी के प्रति हमारी जिम्मेदारी का स्मरण करने का एक मौका है। हम सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए ताकि हमारे ग्रह को आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ और रहने योग्य बनाया जा सके।विश्व पृथ्वी दिवस पर मेरी स्वरचित रचना-

शीर्षक—“क्या होगा तेरा इंसान?”

कंकरीटों का जाल बिछा
कटे खेत- खलिहान ।
पशु -पक्षी सब बेघर हुए
आगे क्या होगा परिणाम?
एक तरफ विकास है
एक तरफ विनाश ।
एक तरफ एशोआराम है
एक तरफ श्मशान ।
बूंद-बूंद को तरसेगी धरती
प्यासा होगा हर इन्सान ।
अन्न, जल जब कुछ ना होगा
व्याकुल होगा तब इन्सान ।
अरण्य धीरे-धीरे सिमट रहे हैं
हवा का ना होगा नामोनिशान ।
साँसे भी जब थमने लगेंगी
सोच, क्या होगा तेरा इन्सान ?
श्रीमती लक्ष्मी चौहान ‘रोशनी’
कोटद्वार, उत्तराखंड

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