
समाज का दर्पण हर पल,
सच्चा अक्स दिखाता है।
क्या सही और क्या गलत?
हम सबको समझाता है
कहीं बेटियों की पूजा होती हैं,
कहीं होता है उन पर अत्याचार।
बेटे भी सुरक्षित नहीं आजकल,
उनके लिए भी असुरक्षित संसार।
रूढ़िवादी समाज की परंपराओं में,
जीवन बिखर सा गया है।
ऊंच-नीच अपने पराये के भेद में,
हर मानव डर सा गया है।
समाज नहीं मनुष्य को बदलना होगा,
तभी दर्पण सच्चाई दिखाएगा।
हर व्यक्ति पहले खुद से संवाद करें,
समाज के दर्पण में बदलाव आएगा।
सौ, भावना मोहन विधानी ✍️
अमरावती महाराष्ट्र।



