
तुम बिन सब कुछ सूना लागे
ना दिन लागे मनवा ना रात काटे
रही गयी बीच वो मिटा दे दूरियां
सावन सुहाना,ना बरसात सुहानी लागे
तरस रही अखियां मेरी रोई रोई लागे
छूट रही सांसें ख्वाब ना होते पूरे लागे
बता कब आओगे ए प्राण *प्रिया*
सब कुछ अब सूना सूना लागे
धड़कनों से मिले जो धड़कने
दो जिस्म एक जान लागे
आ जा बैरी ना ओर सता अब
बिन देखे तुझे ना नैना बंद हो जावे
प्रिया काम्बोज प्रिया ✍🏻 स्वरचित
सहारनपुर उत्तर प्रदेश




