साहित्य

मित्रता कृष्ण सुदामा सी

डा राजेश तिवारी

जैसे दूध अरु नीर मिलत है वैसे ही मिलते ।

अगर दूध में दाहकता हो पहले जल जलते ।।

पीर जो समझे अपनी ही ।।

मित्रता कृष्ण सुदामा सी।।

 

राम ,सुग्रीव ,विभीषण , निषाद को गले लगाते ।

मित्र सुह्रदय अभिन्न होत हैं ये संत शास्त्र गाते ।।

संगति से हो विपत नासी ।

मित्रता कृष्ण सुदामा सी।।

 

धीरज धर्म मित्र अरु पत्नी आपत्ति के संगी ।

सदा साथ दें यदि आ जाये कोई भी तंगी ।।

दोस्ती होय बहुत सांसी ।

मित्रता कृष्ण सुदामा सी।।

 

अपने दुख से अधिक मित्र के दुख को जो समझे ।

अपनादुख लघु मित्र के दुख को बहुत बड़ा समझे ।।

मित्रता होती वही खासी ।

मित्रता कृष्ण सुदामा सी।।

 

मक्खन सा मन करना लेकिन धोखा नहीं देना।

देना देना सीख दोस्त तुझे न पड़े कभी लेना ।।

विपत्ति कृष्ण कृपा नासी।

मित्रता कृष्ण सुदामा सी।।

 

डा राजेश तिवारी मक्खन

झांसी उ प्र

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!