साहित्य

गज़ल

ममता झा मेधा

हमारी बात सुनकर के तुम्हें कुछ तो लगा होगा।
उजागर राज करता जो भला कैसे सगा होगा।।

रखो पाकीज़गी दिल में लगे ना दाग दामन में।
बड़ा मायूस आलम है कभी मुझसे खफा होगा।।

बड़ी मुश्किल हमारी है तुम्हारी आदतें ऐसी।
जरा रोते हुए को तुम हॅंसाना तो भला होगा।।

करो कुछ काम ऐसे भी कि दुनिया देखती जाए।
जमीं से जो जुड़ा मानव कभी भी बेवफा होगा।।

रही है देख ममता भी बड़ा ज़ालिम जमाना है।
भरोसा ईश पर रखना विजेता मन सदा होगा।।
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ममता झा मेधा
डालटेनगंज

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