साहित्य

आप जो ना होते

नन्द किशोर जोशी

आप जो ना होते
मुझे ऐसा कौन दिखाता
जो झाडू मारकर भी
वो थप्पड़ मुझे दिखाता I
आप जो ना होते
बुलाकर कौन मुझे मारता
शीशमहल मुझे दिखाकर
मेरे दिल में काँच चुभाता I
आप जो ना होते
लहू का रंग कौन बताता
मार मार कर डंडे
कमरे में बंद कौन करता ।
आप जो ना होते
मुझे ये राज कौन बताता
ऐसी नीति मुझे कौन सिखाता
तो राजनीति मैं कैसे करता I
आप जो ना होते
मुझे झूठ बोलना कौन सिखाता
फिर मुँह छिपाना कौन सिखाता
फिर झूठी कसम कौन सिखाता I
आप जो ना होते
तो ये दुर्योधन कहाँ से आता
ये चीर हरण कौन करता
फिर ये पापी दु:साशन ना हसता I
आप जो ना होते
तो फिर चरित्र हनन कौन करता I
मेरी मजबूरी लाचारी को
फिर मेरी कमजोरी कौन मानता I
आप जो ना होते
तो ये शकुनी मामा ना पैदा होता
ये चक्र्ब्युह फिर कौन रचता
तो आज फिर शर्मिंदा कौन होता I
अब तो आ जाओ
चीर बचाने वाले मानव रूप में
घर घर में चीरहरण कितना देखोगे
अत्याचार से कब इनको बचाओगे I
कदम कदम पर लुटती ईज्जत
कब तक इसको सह कर देखोगे
कब तक बंशी आप बजाओगे
कब हाथ में प्रभु सुदर्शन उठाओगे I
नन्द किशोर जोशी
ग्राम पाटली
वाया गरुड़ बैजनाथ
जिला बागेश्वर उत्तराखंड

संप्रति : वापी गुजरात

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