जीवन की परिभाषा में जीवन की आशा
निराशा, अभिलाषा सब छिपी होती हैं,
जीवन में अक्सर कभी धूप तो कभी छाँव
कभी ख़ुशियाँ कभी ग़म का दर्द मिलता है।
कभी हक़ीक़त का सच तो कभी भुलावा
और धोखा भी जीवन में दिखता है,
कोई कभी मित्र और फिर वही मित्र स्वार्थ
में डूबा दुश्मनी करता हुआ दिखता है।
किसी इंसान की शक्ति सम्पन्नता के
तेज का कारण धन सम्पन्नता या
उसकी आयु नहीं होती बल्कि उसमें
तेजस्विता तो स्वाभाविक होती है।
उसमें वैसी ही स्वाभाविक तेजस्विता
होती है जैसे सिंह शावक शिशु होने
पर भी मदमस्त हाथियों के झुण्ड पर
भी निडर होकर आक्रमण करता है।
बीत गया जो समय उसे कहाँ कोई
भी कभी रोक कर रख पाता है,
वर्तमान का साथ रोशनी की तरह है
अंधेरे में साया भी साथ नहीं निभाता है।
सफलता जिसे मिलती है वह हर
मुश्किल को जीत कर आगे आता है,
मुश्किलों से जो भय खाता है वह
कहाँ सफलता का स्वाद पाता है।
धर्म और क़र्म करते रहना होगा, दोनो
ही हमारे लिये अपने हित में होते हैं,
धर्म हमें सत्य की राह पर ले जाता है,
क़र्म उस राह पर चलना सिखाता है।
प्रशंसा और आलोचना दोनो ही
हमारे अपने हित में ही होती हैं,
आदित्य प्रशंसा प्रोत्साहन देती है,
आलोचना फिर से अवसर देती है।
विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल
आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ




