
प्यार का खुमार चढ़े अपनों को देख देख
दूसरों को देख देख ना मुंह को फुलाइए।
चाहते हो प्यार पाना दुनिया में सबसे तो ।
प्यार और एकता की भावना जगाइए
रहे खुश पड़ोसी सदा मन में है इच्छा तो ।
ईर्ष्या नफरत बैर की भावना मिटाइए ।
चाहते हो मंजिल पे समय से पहुंचना तो ।
उतरी चेन साइकिल की टाइट करवाइए।
घेरा अगर हो चिंताओं ने मन तो।
परम महा ज्ञानियों से जा मिल आइए ।
सूझवान गुणवान और विद्वावान यहां।
काव्य का ज्ञान यहां आके ले जाइए।
चाहते दही खाना स्वादिष्ट अगर आप तो।
दूध में थोड़ा सा जामन तो मिलाइए।
काव्य पाठ चाहते हो मंच पर करना तो।
मां वीणा के चरणों से आओ जुड़ जाइए।
पंडित मुल्क राज ‘”आकाश”
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश




