
चलो न आगे पीछे साथी ,चलो सदा ही संग।
जीवन की गाड़ी दौड़ेगी, मिले स्वप्न को रंग ।।
दुख का क्या है आए जाए ,होना नहीं उदास ।
द्वंद अंतर्मन का रोको भी, बोझिल मत कर श्वास।।
राह मौन में हम ढूंढेंगे, भरकर हृदय उमंग।
जीवन की गाड़ी दौड़ेगी,मिले स्वप्न को रंग।
सात वचन जो साथ लिए हो ,कभी न भूलो मीत।
हाथ थाम कर साथ रहोगे, तुम्हें निभाना रीत।।
नोंक -झोंक में रूठ न जाना,समझ न लेना जंग।
जीवन की गाड़ी दौड़ेगी मिले स्वप्न को रंग।।
ताना देना बात सुनाना ,नहीं छोड़ना साथ ।
संग कटे यह सारा जीवन, डाल हाथ में हाथ।।
बदले मौसम बदले दुनिया ,तुम न बदलना ढंग।
जीवन की गाड़ी दौड़ेगी, मिले स्वप्न को रंग। ।
किरण कुमारी ‘वर्तनी’जमशेदपुर




