
सहर्ष तुम स्वीकार करो
विज्ञान का चमत्कार करो।
आए हो इस जग जहां मे
नव नव अविष्कार करो।।
मानव तू मानवता अपनाओ,
छल ,कपट,छोड़ ,मित्रता लाओ
तुम एक दूजे से प्यार करो,
सहर्ष तुम स्वीकार करो।।
वृक्ष लगाना, जल बचाना,
मानव तुम ,जग कल्याण करो।
मरहम लगाना, गले लगाना
सहर्ष तुम स्वीकार करो।।
संस्कार पाकर, संस्कारी बनो
राम–कृष्ण,अर्जुन ,धनुधारी बनो
अंधविश्वास,क्रूरता बहिष्कार करो
सहर्ष तुम स्वीकार करो।।
अब दुर्जन,दुष्ट,न दुराचारी बन,
हर , नारी का सम्मान करो।
बंद करो अब, जन जीव हत्या
स्वच्छ जीवन ,स्वीकार करो।
प्रकृति के कण – कण
बदल रहा हैं पल – पल
जीना है तो, नव निर्माण करो
सहर्ष तुम स्वीकार करो।
मुन्ना प्रसाद
शिक्षक सह कवि
रोहतास बिहार




