
है स्वप्न मेरा हिंदी,
जन जन की भाषा बन जाए।
रहे ना सीमित केवल भारत में,
विश्व की भाषा बन जाए।
हिंदी का विश्व पताका,
विश्व भर में लहराए।
बोली और समझी तो जाती है,
अब भी विश्व के कुछ देशों में,
मेरा स्वप्न है हिंदी ,
बोल चाल की भाषा में,
संपूर्ण विश्व में छा जाए।
है स्वप्न मेरा हिंदी,
विदेशों में भी पठन – पाठन में आ जाए,
अपनी मातृ भाषा के साथ बच्चे
हिंदी भी पढ़ने जाए।
एक भाषा के रूप में हिंदी,
हर देशों में अनिवार्य पढ़ी जाए।
हिंदी को विश्व पटल पर चमकाए।
है स्वप्न मेरा हिंदी,
विश्व में भी लेखन में आ जाए।
विदेशों में भी चले लेखनी,
साहित्य रची जाए।
पताका हिंदी विश्व में फहराए।
बोल चाल की भाषा जगत में,
हिंदी ही बन जाए।
दे अंग्रेजी को मात हमारी,
हिंदी आगे निकल जाए।
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बंदना मिश्रा मिसरी
देवरिया उत्तर प्रदेश



