
फिर से तुम्हारी बातें
मेरी रूह को स्पर्श कर गई
आंखों से आंसू बहने लगे
जज्बात उमड़ पड़े
यूं लगा जैसे गर्मी की तपिश में
तुमने शीतलता की चादर ओढ़ा दी
तुम्हारी नाराजगी में भी फिक्र को महसूस किया
अपनी छाया में यूं ही हमेशा रखना
करती हूं महसूस तुम्हें हरपल अपने पास
तुम्हारी खुशबू मेरे एहसासों में समाई रहती हैं।
तृषा सिंह
देवघर, झारखंड




