
वीर विवेकानंद का, जन्म मनाएँ आप l
माल चढ़ा प्रिय चित्र पर,करें ध्यान औ’जाप ll
ध्यान नित्य करते रहे, वीर विवेकानंद l
‘ईश्वर’ वैसा कर सभी, नित पायें आनंद ll
कर्मयोग के साथ में, करें आप नित ध्यान l
कहे विवेकानंद जी, तभी मिलें भगवान ll
दीनों की सेवा करें, तन मन धन से आप l
सच्ची पूजा ईश की, और यही है जाप ll
नहीं अशिक्षित हो यहाँ, करिये ऐसा काम l
‘ईश्वर’ ऐसे ध्येय से, होगा जग में नाम ll
ईश्वर चन्द्र विद्यावाचस्पति, संत कबीर नगर (उत्तर प्रदेश)




