
मीनाक्षी की
लोहड़ी की अग्नि में मैने चिंताओं को जलाया ।।
रोग शोक को दूर भगाया ।।
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रेवड़ी की मिठास मूंगफली की गर्मी !!
नूतन वर्ष में रहे न कोई कमी !!
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आ गया अब संक्रांति का त्योहार !!
मन में आए नई बहार !!
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पतंग की डोर ली अपने हाथ में !!
अपनी डोर दी शिवशक्ति के हाथ में !!
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अपनी पतंग करे सूर्य नमस्कार !!
प्रकट करे शिवशक्ति का आभार !!
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पतंग ने शिक्षा ली है निर्भयता की !!
पतंग भी जी रही जिंदगी अनुभव की !!
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कटने के डर से उड़ना छोड़ती नहीं !!
परख के हवाओं का रुख,
मुड़ जाती है वही ।
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मैं और मेरी पतंग ,
आसमान में रंगीली गंगा की महसूस कर रहे थे क्रांति !!
इस तरह मनाई मीनाक्षी ने लोहड़ी और मकर संक्रांति !!
मीनाक्षी महाजन पठानकोट पंजाब




