
“”माथे पर सिकन है,
चेहरे पर झुर्रियां,
ना नूर है, ना जमाल है,
बहनों, भाईयों —–
ये तो बस पांच किलो रासन का कमाल है”‘
डॉ नवीन मौर्या “फायर बनारसी ” हास्य व्यंग कवि काशी।

“”माथे पर सिकन है,
चेहरे पर झुर्रियां,
ना नूर है, ना जमाल है,
बहनों, भाईयों —–
ये तो बस पांच किलो रासन का कमाल है”‘
डॉ नवीन मौर्या “फायर बनारसी ” हास्य व्यंग कवि काशी।