साहित्य

कागज़ों का राज

बेख़ौफ़ शायर डा.नरेश सागर

 

झूठ के सर ताज है, कागजों का राज है
घोटालों के राज़ में, उम्मीदो का साज है
झूठ के सर …..…

योजनाएं मिल रही, बस कागज़ के पन्नों पर
किसान का हक लिख दिया, देखो कैसे गन्नों पर
टूटी फूटी सड़कें हैं , फ्लाईओवर की खाज है
झूठ के सर………

अन्याय जग जाहिर है, नेता बड़े ही माहिर हैं
बेगुनाहों को सजा, गुनहगार तो साहिर है
कागज़ों में लिपटा ,देखा उड़ता बाज है
झूठ के सर……..

सब कागज़ की फाइल पर,लिख दिया सयानो ने
झूठ को सच लिख दिया,कागज़ पर बयानों ने
टूटी झोंपड पट्टी है , कागज़ पर लिखा ताज है
झूठ के सर………

इस कागज पर लिक्खी है, धर्म ग्रंथों की गाथा
गीत ग़ज़ल भजन कहानी,भारत भाग्यविधाता
इस कागज के सर बंधा ,बदनामी का ताज है
झूठ के सर……..

स्कूलों से अदालत,और थानों की फाइल पर
आसमान धरती से लेकर, सागर के साहिल पर
हर जगहा ये कहती हैं, कागजों का राज है
झूठ के सर ताज है, कागजों का राज है।।
……….
मूल रचनाकार-
बेख़ौफ़ शायर डा.नरेश सागर

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