
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के,दुर्गादल की वे सेनापति।
सेना की महिला शाखा की,झलकारी बाई सेनापति।।
लक्ष्मीबाई की हमशक्ल लगें,वीरांगना झलकारी बाई।
शत्रु को चकमा देते लड़ें,रानी वेश में झलकारी बाई।।
अंग्रेजों युद्ध लड़ी बहादुर,झलकारी बाई थी वीरांगना।
अंतिम समय में रानी के वेश में,युद्ध करते वीरांगना।।
गोरों द्वारा पकड़ी गयीं,तब रानी को मौका मिल गया।
लक्ष्मीबाई को किला से भागने में,अवसर मिल गया।।
ग्वालियर में घुड़सवार रूप वही,झलकारी की स्फूर्ति।
वीरांगना झलकारी बाई की,भी लगी हुई सुंदर मूर्ति।।
झलकारी बाई 22नवंबर1830,जन्मीं हैं झांसी पास।
भोजला गाँव में एक निर्धन,कोली परिवार रहे पास।।
उनके पिता सदोवर सिंह-माता का नाम जमुना देवी।
झलकारी बाई के बचपने ही,चल बसीं जमुना देवी।।
पिता ने झलकारी को एक,लड़के की तरह पाला था।
अपनी गरीबी में जैसे भी होसका,प्यार से पाला था।।
झलकारी बचपन से थी,बड़ साहसी दृढ़प्रतिज्ञ बाला।
उन दिनों के सामा.परि. कारण,पढ़ न पाई है बाला।।
बाई को कोई औपचारिक शिक्षा,यह नहीं मिल।पाई।
झलकारी घरेलू काम,पशुओं की देख रख कर पाई।।
जंगल से लकड़ी इकट्ठा करने,के काम भी करती थीं।
वो घुड़सवारी के शौक,अस्त्र-शस्त्र प्रयोग करती थी।।
स्वयं को एक अच्छे योद्धा,रूप में विकसित करी थी।
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में,झाँसी की रानी के संग थी।।
ब्रिटिश सेना के विरुद्ध,अद्भुत वीरता से वह लड़ी थी।
अंग्रेजी सेना के कई हमलों को,वह विफल करी थी।।
एक बार जंगल में उसकी मुठभेड़,तेंदुए से होगई थी।
अपने कुल्हाड़ी से उस तेंदुआ को,वो मार डाली थी।।
डकैतों के गिरोह ने,गाँव व्यवसायी पर हमला किया।
तब बहादुर बाई उन्हें,पीछे हटने को मजबूर किया।।
इसकी बहादुरी से खुश हो,गाँव वाले उसका विवाह।
लक्ष्मीबाई सेना सैनिक,पूरन सिंह कोली से विवाह।।
पूरन भी बड़े बहादुर थे,पूरी सेना इसके बहादुरी का।
लोहा मानता था एवं सम्मान,देता उसे बहादुरी का।।
एक बार गौरीपूजा में,झलकारी ग्राम महिलाओं संग।
महारानी को सम्मान देने,झाँसी किला में गयीं संग।।
रानी लक्ष्मीबाई उनको देख,कर तब अवाक रह गईं।
झलकारी एकदम,रानी लक्ष्मीबाई सा उन्हें लग गईं।।
लक्ष्मीबाई व झलकारी रूप,में आलौकिक समानता।
ईश्वर एवं कुदरत का करिश्मा है,नैसर्गिक समानता।।
अन्य औरतों से झलकारी के,बहादुरी के किस्से सुन।
रानी लक्ष्मीबाई बड़ी प्रभावित,हुईं उनको हुआ धुन।।
रानी ने झलकारी को दुर्गासेना में,भर्ती आदेश दिया।
झलकारी महिलाओं संग,बंदूक दागना सीख लिया।।
तोप चलाना-तलवारबाजी,प्रशिक्षण वो प्राप्त किया।
उस वक्त झांसी सेना को,गोरों से लड़ सकने किया।।
यदि लक्ष्मीबाई के सेनानायकों में एक ने उनके संग।
विश्वासघात न करता तो,अभेद्य किला से गोरे तंग।।
यह ब्रिटिश सेना के लिए तो,बिल्कुल ही अभेद्य था।
रानी लक्ष्मीबाई को धोखा दिया गया वो अजेय था।।
झलकारी बाई की गाथा,बुंदेलखंडी लोककथाओं में।
लोकगीतों में आज भी,सुनी जाएँ लोकगाथाओं में।।
वीरांगना झलकारी बाई को,वीरगति प्राप्त झांसी में।
4अप्रैल1857झलकारी बाई,अमर भारत-झांसी में।।
भारतीय स्वतन्त्रता सेनानी,रूप में हुई जगतप्रसिद्ध।
भारत सरकार हुई,झलकारी बाई के प्रति प्रतिबद्ध।।
भारत सरकार ने 22 जुलाई 2001 में छापा टिकट।
झलकारी बाई के सम्मान में,जारी एक डाकटिकट।।
उनकी प्रतिमा व,एक स्मारक अजमेर-राजस्थान में।
उनकी एक प्रतिमा उप्र सरकार,स्थापित आगरा में।।
उनके नाम से लखनऊ में,एक धर्मार्थ चिकित्सालय।
सब को सेवाएं देना शुरु कर दिया ये चिकित्सालय।।
शत शत नमन कोटिश: वंदन,वीरांग. झलकारी बाई।
सबको जन्म जयंती की,हार्दिक शुभकामनाएं भाई।।
ज्ञान विभूषण डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*
सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रवक्ता-पी.बी.प्रतापगढ़ (उ.प्र.)
(शिक्षक कवि लेखक साहित्यकार समीक्षक एवं समाजसेवी)




