
भूख सिर्फ गरीबों के घर पे ही क्यूं आती
क्या कारण है इसका कुछ बता दो मेरे साथी
बाल गोपाल को रूला कर क्यूं चली जाती
महल दोमहलों में तुम क्यूं कभी नहीं आती
झोपड़पट्टी वाले से क्या है तेरा गहरा नाता
दिन रात इनके दर पे तूँ मटकता दिखलाता
कौन सी पाप का ले रहा है इनसे बदला वार
दुःखी मन से देखो रोता है झोपड़ी का द्वार
दिन रात मेहनत क्या गरीब नहीं है। यहाँ करता
फिर भी आराम से परिजन का पेट कब भरता
कौन सी खता पे तुम इनपे करता है ये अत्याचार
रूला रूला कर मजबूर को करता है तूँ प्रहार
ओ रब भूख को तुमने क्यूं जग में नाहक ही बुलाया
गरीबों के घर पे भेज कर क्यूं इन्हें परेशान कराया
जीने का हक पर भी इनको है जन्मसिद्ध अधिकार
इन पर बन्द करो अन्याय और अनहित प्रतिकार
मानव जाति में जन्म जग में है अति ही निराला
मत कर इनका दिन रात दुःख में जीवन को काला
इनके साथ भी प्रभु हो तेरा न्याय व तेरा उपकार
हँसता खेलता जीवन हो इनका कर दो चमत्कार
उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बांका बिहार




