साहित्य

हमारे त्योहार

संजय प्रधान

उत्तरायण में मौसम ने भी बदली चाल,
सूर्य प्रकाश के आने से चमक रहे पर्वतों के भाल,
त्योहारों के मौसम में उतरने लगे गर्म कपड़े,स्वेटर, शाल,
गुज़र रही सर्दी अब नही होगा ज़ुकाम खांसी से बुरा हाल।

मकरसंक्रांति है देश का प्रिय त्योहार,
लोहड़ी, पोंगल, बसंत देते सुंदर उपहार,
संस्कृति की अनोखी यही परम्परा देती हमें सुसंस्कार,
आगामी पीड़ी को भी देगें हम संस्कारों का उपहार।

आस्था से चल रहा नदियों में
भक्तों का स्नान,
पूजन अर्चन कर सूर्य को अर्पित करेंगे सब भोग प्रसाद,
दान पुन करने से मिलेगा पुण्य लाभ,
खिचड़ी, घी,दही,पापड़, आचार है सूर्य भगवान का सुंदर प्रसाद।

विस्तृत नीला आसमान है नहीं आयेगी आज बरसात,
मैदानों छतों पर जमी है आज बच्चों, जवानों,बूढ़ो की टोली,
चरखी से छूटी पतंगें जा पहुंची आसमान बन कर मेहमान,
स्वागत को पतंगों के तैयार हैं स्वर लहरियों की मीठी बोली।
संजय प्रधान
देहरादून।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!