साहित्य

पतंग

मीनाक्षी शर्मा मनुश्री

मस्त मगन उड़ू गगन में
पर धरा पर भी आ जाऊ
मेरी डोर न मेरे कर में
रहूँ किसी के नियंत्रण में

नील गगन में उड़ उड़ कर
आकर्षण फैलाऊ मंडरा कर
इन्द्रधनुषी रंगों से सजकर
नाचूं सबको आकर्षित कर

हवा संग हिल हिलोरे खाऊ
नन्ही दूर जाकर बन जाऊं
नियंत्रण में न अगर होती
डरती जानें कब खो जाऊँ

करें प्रसंशा जो देखे मुझको
मन ललचाय पा ले इसको
कहें इसके बड़े सुन्दर रंग
भायी जाती कहलाऊं पतंग

खामोशी से उड़ती रहती
देती सबको शुभ संदेश
घूमों चाहे सारे जहान में
न छोड़ो अपना परिवेश

मीनाक्षी शर्मा मनुश्री
गाजियाबाद

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