
जब वह थी तो जीवन था
जब वह थी तो आनंद था,
मेरी शक्ति तो वही थी मैं तो केवल उसका दर्पण था।
वह थी तो संसार मेरा था,
उसका घर बार प्यार सिर्फ मेरा था।
उसका हार सिंगार मेरा था।
मेरे लिए था पूरा संसार।
उसका संसार तो केवल घर मेरा था।
वह रानी थी मैं राजा था।
जब भी मैं आऊं खुला दरवाजा था।
हर बंधन उसमें स्वीकार किया,
मुझसे निश्चल प्यार किया,
क्यों अकेला छोड़ गई मुझको,
जब सात फेरों में साथ रहने का किया वादा था।
जब वह थी तो जीवन था।
मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा




