साहित्य

सकारात्मक सोच

सुमन बिष्ट

हर वस्तु, प्राणी में अच्छा देखना,
ये मन को समझाना सिखाना है ,
सोच बदलते ही अपने जीवन में,
नव प्रभात सा उजियारा लाना है।

सकारात्मकता कोई संयोग नहीं,
यह तो सचेत मन का चुनाव है
हर परिस्थिति में आशा ढूंढना,
यही जीवन का सच्चा स्वभाव है।

कहते हैं
जैसी दृष्टि होगी वैसा संसार होगा
जैसा भाव होगा वैसा विस्तार होगा,
तभी जैसे विचारों को हम संजोएँगे
वैसा ही सपनों का सुंदर संसार होगा।

सुख-दुःख भी शिक्षक बन जाता है,
विवेक से सूझ-बूझ आ जाती है,
गर अंधेरे में उर्जा का दीप जलाओ
तो सही राह स्वयं ही मिल जाती है।

जब शब्द हमारे मन के बीज बन,
मन की गहरी धरती में बोए जाएंगे
भरोसे की खाद मिले उन्हें तो,वो
स्वयं सुख के फूल से लद जायेंगे।

इसलिए
ध्यान से सोचो, चुनो और संवारो,
अपने विचारों का सकल संसार,
क्योंकि जीवन की सारी खुशियाँ,
विचारों से ही पाती सुंदर आकार।

सुमन बिष्ट, नोएडा

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