आलेख

एक महिला ने AIIMS बनाया, कांग्रेस ने नाम मिटा दिया

कुमुद रंजन सिंह

राजकुमारी अमृत कौर: जनस्वास्थ्य की असली शिल्पकार

भारत के आधुनिक चिकित्सा इतिहास में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (AIIMS) केवल एक अस्पताल या शिक्षण संस्थान नहीं है, बल्कि यह एक विचार है—विश्वस्तरीय जनस्वास्थ्य का विचार। लेकिन इस विचार की असली शिल्पकार का नाम इतिहास की किताबों से लगभग गायब कर दिया गया। वह नाम है—राजकुमारी अमृत कौर।

इतिहास में बार‑बार लिखा गया कि “नेहरू ने AIIMS बनाया।” यह पंक्ति इतिहास नहीं, बल्कि राजनीति द्वारा गढ़ा गया नैरेटिव है। सच यह है कि AIIMS राजकुमारी अमृत कौर की दूरदृष्टि, त्याग, संघर्ष और नेतृत्व की देन है।

राजकुमारी अमृत कौर: व्यक्तित्व और दृष्टि

राजकुमारी अमृत कौर भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री थीं। स्वतंत्रता आंदोलन की तपस्या से निकली यह शाही महिला सत्ता की नहीं, सेवा की प्रतीक बनीं। उनका सपना था—भारत में ऐसा चिकित्सा संस्थान बने जो दुनिया के श्रेष्ठ संस्थानों की बराबरी कर सके, जहाँ गरीब से गरीब नागरिक को सर्वोत्तम इलाज मिले और जहाँ भारत के डॉक्टर विश्वस्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त करें।

वह ज़मीन, जो उन्होंने राष्ट्र को दे दी

आज का AIIMS दिल्ली, अंसारी नगर की लगभग 190 एकड़ की बहुमूल्य भूमि पर खड़ा है। यह भूमि न सरकार ने खरीदी, न अधिग्रहित की। यह राजकुमारी अमृत कौर की पारिवारिक संपत्ति थी, जिसे उन्होंने राष्ट्र को दान कर दिया। आज के मूल्य पर यह भूमि हज़ारों करोड़ रुपये की है—और यह त्याग इतिहास का सबसे बड़ा अनकहा अध्याय है।

वह संसाधन, जो उन्होंने जुटाए

आज़ादी के बाद भारत आर्थिक रूप से जर्जर था। कांग्रेस के पास न संसाधन थे, न चिकित्सा ढाँचा। तब अमृत कौर ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का पक्ष रखा, न्यूज़ीलैंड और अन्य देशों से सहयोग जुटाया, उपकरण, प्रशिक्षण और विशेषज्ञता भारत लाई। AIIMS विदेशी सहायता से बना—और वह सहायता उनकी कूटनीति से संभव हुई।

वह कानून, जिसे उन्होंने पारित कराया

AIIMS अधिनियम, 1956 उनकी दृढ़ता का परिणाम था। नौकरशाही की सुस्ती, मंत्रिमंडल की उदासीनता और राजनीतिक टालमटोल के बीच उन्होंने फाइलें आगे बढ़ाईं, बहस करवाई और संस्थान को वैधानिक आधार दिलाया।

राजनीतिक ब्रांडिंग बनाम संस्थान निर्माण

नेहरू ने उद्घाटन किया, भाषण दिए, और तैयार कार्य को औपचारिक स्वीकृति दी। लेकिन संस्थान का निर्माण—विचार से लेकर क्रियान्वयन तक—राजकुमारी अमृत कौर ने किया। यह अंतर समझना ही इतिहास का न्याय है।

क्यों भुला दी गईं अमृत कौर?

क्योंकि उनका सच तीन मिथक तोड़ देता है—

1. कांग्रेस ने भारत बनाया

2. नेहरू ने संस्थान खड़े किए

3. सत्ता = योगदान

AIIMS इन तीनों का उलटा प्रमाण है।

इतिहास को न्याय

एक शाही महिला ने अपनी पूरी विरासत जनस्वास्थ्य को समर्पित कर दी। कांग्रेस ने श्रेय ले लिया।

AIIMS राजकुमारी अमृत कौर की विरासत है।
कांग्रेस ने केवल नामपट्टिका लगाई।

बलिदान किसी और का — प्रचार किसी और का।

यह स्मारिका आलेख भारत के जनस्वास्थ्य इतिहास की उस महान नायिका को समर्पित है, जिसने बिना शोर किए देश की सबसे बड़ी चिकित्सा संस्था खड़ी कर दी।

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