
दिल में जो सुलग रहा वह आग ही तो है
हृदय में बस रहा है वह अनुराग ही तो है।
जीवन में जब तक वह साथ रहा मेरे
जो बज रहा है जीवन में प्रेम राग ही तो है।
शमा मोहब्बत का दिल में झिलमिला रहा
दिल में जल रही है वह प्रेम चिराग ही तो है।
तुम पास रहो या दूर रहो मुझसे सनम
हमने लगाया है प्यार का वह बाग ही तो है।
इस बाग की हरियाली बनी रहे सदा
प्यार की बरसात की ये फुहार ही तो है
जीवन भर ये नशा सिर से उतरे न कभी
बीते जिंदगी ऐसे ही ये खुमार ही तो है।
मीरा बनी घूम रही है यह तुम्हारी निधि
प्रेम भी तुमसे, पर अब यह विराग ही तो है।
डॉ. अनिता निधि
जमशेदपुर, झारखंड




