
जीवन के हर एक पल छन को
कैद किया शब्दों में एक दिन
कितनी संचित खुशिया की ओर
कितना दुखों को सहा निस दिन
कितनी खुशियां मिली सभी से
कितना प्यार मिला है हर दिन
दुखों को कितना झेला मैंने
उपहास सहा है मैने हर दिन।
कितने संकीर्ण दिलो को देखा
बेवजह की बात को झेला
जीवन की डायरी लिखने बैठा तो
आकलन स्वयं का होते देखा।
छोटी-छोटी बातों पर मैने।
रौद्र रूप धारा था निस दिन
अपेक्षाएं हर एक से की और
खुशियां कितनी बाटी हर दिन
बात समझ में आई इतनी
गर जीवन खुशियों में जीना
खुश और मस्त सदा ही रहना
जीवन श्रेष्ठ सरल है जीना
भक्ति मार्ग को सदैव अपनाना
खुशियों को सही पहचाना
यही शब्दों का श्रेष्ठ राग है।
खुशियों का अविरल वैराग है।
पंडित मुल्क राज “आकाश”
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश




