
युवा प्रणेता जननायक को,करता राष्ट्र प्रणाम है।
नाम विवेकानंद है जिनका,छवि सुंदर अभिराम है।।
मास जनवरी जन्म लिया जब, शुभ मंगल अवसर आया।
विश्वनाथ अरु भुवनेश्वरी ने,पुत्र एक सुंदर पाया।।
सूर्य छवि थी आभा जिनकी,किए कर्म निष्काम है।
नाम विवेकानंद है जिनका,छवि सुंदर अभिराम है।१।
शिव पूजन में लीन सदा वह, तर्कशील बातें उनकी।
नटखट बालक पन में बीता, जिज्ञासु रातें जिनकी।।
रामकृष्ण से गुरु थे जिनके,सेवा आठों याम है।
नाम विवेकानंद है जिनका,छवि सुंदर अभिराम है।२।
धर्म जाति का भेद न उनमें, प्रेम सभी से वह करते।
संन्यासी सा जीवन उनका, अध्यात्म शिखर हैं नित चढ़ते।।
अमरीका के सम्मेलन में बोला उनका काम है।
नाम विवेकानंद है जिनका,छवि सुंदर अभिराम है।३।
एक नहीं वह सौ पर भारी, कायस्थों की शान हैं।
मंद सदा मुस्कान छवि है,हम सबका वह मान हैं।।
धन्य हैं उनके मातु पिता गुरु,धन्य धरा वह धाम है।
नाम विवेकानंद है जिनका,छवि सुंदर अभिराम है।४।
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डाॅ.राजेश श्रीवास्तव राज




