
“”रोजी तो सब तुम खा जाते,
रोटी मिलती जेल में,
पास हुए जो क्या समझेंगे,
कितना सुख है फेल में।
मेरा मन ऐसे घबराए,
सर हो जैसे तेल में,
हे महामानव नहीं बचा कुछ,
अब तेरे इस खेल में।।

“”रोजी तो सब तुम खा जाते,
रोटी मिलती जेल में,
पास हुए जो क्या समझेंगे,
कितना सुख है फेल में।
मेरा मन ऐसे घबराए,
सर हो जैसे तेल में,
हे महामानव नहीं बचा कुछ,
अब तेरे इस खेल में।।