
हर आहट पर लगता है कि तुम आए हो,
हवाओं में जैसे अपनी खुशबू ले आए हो।
ये इंतजार अब इम्तिहान सा लगने लगा,
क्या सच में हमें इस कदर भुलाए हो।
घड़ी की सुइयां जैसे थम सी गई है,
आंखों में नींदे भी अब जम सी गई है।
तुम्हारे बिना यह शाम ढलती ही नहीं,
जिंदगी इंतजार के साए में थम सी गई है।
नजरे बिछी है उस मोड पर आज भी,
दिल डूबा है पुराने किसी मोड़ पर आज भी।
वक्त गुजर गया पर यादें वही ठहर गई,
हम खड़े हैं तुम्हारी तलाश में आज भी।
तेरा आना जैसे मरुथल में सावन का होना,
बिना तेरे मुश्किल है चैन से जागना या सोना।
ये फासले मिटा दो कि अब रहा नहीं जाता,
इंतजार का फल अब कड़वा लगा है होना।
पंडित मुल्क राज “आकाश”
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश




