साहित्य

नीम हकीम ख़तरे जान – लोकोक्ति

मुकेश कुमार दीक्षित 'शिवांश'

पोते ने दादा से पूछा,
नीम हकीम ख़तरे जान,
पता नहीं कैसे दादा जी
करते इसकी सब पहचान।
दादा बोले, ज्ञान अधूरा
कर देता सब का नुकसान ,
काम वही अच्छा कर पाता
जिसको अनुभव वाला ज्ञान।
इसीलिए सब कहते भैया
नीम हकीम ख़तरे जान,
अनुभव अरु योग्यता से ही
कर लो इसकी तुम पहचान।

मुकेश कुमार दीक्षित ‘शिवांश’
चंदौसी
मो ०- 8433013409
दिनांक- 30-1-2026

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