साहित्य

प्रेम-पत्र

कुलदीप सिंह रुहेला

मैं लिख रहा हूँ प्रेम पत्र, तुम करना स्वीकार प्रिय,
भेजा है ये उपहार, तुम करना स्वीकार प्रिय।

शब्दों में धड़कन रख दी, स्याही में इकरार,
हर अक्षर कहता है तुमसे, बस तुमसे ही है प्यार।

चुपचाप जो आँखों ने, सपनों में बात कही,
वो बात आज काग़ज़ पर, मैंने खुलकर लिख दी।

साँसों में बसी खुशबू, नाम तुम्हारा आए,
हर सुबह, हर शाम यही, दिल गुनगुनाए।

थाम लो इन पंक्तियों को, जैसे थामा हो हाथ,
इनमें मेरी चाहत है, और भरोसे की बात।

दूरी अगर हो कभी तो, ये पत्र सेतु बन जाए,
मेरे मन की हर धड़कन, तुम तक पहुँच जाए।

मैं लिख रहा हूँ प्रेम पत्र, तुम करना स्वीकार प्रिय,
भेजा है ये उपहार, तुम करना स्वीकार प्रिय।

कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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