साहित्य

कर्म ही ईश्वर आराधना है

डॉ रामशंकर चंचल

मानव जीवन
बहुत ही सुंदर, सुखद
ईश्वरीय कृपा, उपहार है
यह एक परम् सत्य है
इतने महत्वपूर्ण सम्मान के लिए
महत्वपूर्ण पूर्ण ईश्वर आशीर्वाद के लिए सदा ही
ईश्वर को धन्यवाद देते हुए
प्रणाम करते हुए
जीवन को सत् क्रम में
लीन रखती हुए
ईश्वर को सदा ही
खुश ओर प्रसन्न रखना ही
सदा ही मानव मात्र कल्याण
भावना विश्व कल्याण सोच
चिंतन को बरकार लिए
कर्म है पर दश्क दे
जीवन सार्थक करना है
सच तो यह है कि
ईश्वर सदा ही चाहता है
कहते हैं कि मैं
तुम्हारे सत् क्रम में
विनाश करते हूं
व्यर्थ मेरी खोजें में
भटकने की बजाय
सदा ही क्रम शील रहे
खुश ओटी प्रसन्न रहे
में हर समय ख्याल रखें हूं
और तुम्हारा कर्म में
निवास कर रहा हूं
काश यह दुनिया इस
शाश्वत सत्य वचन को
समझ ले तो
सोचो दुनिया कितनी
खूब सूरत, शुभ, सुखद
और सदा स्वस्थ
मस्त हो प्रसन्न रहे
हर मानव सुख सुकून
मुस्कान लिए
जीवन को सार्थक कर
सुकन्या महसूस करें

डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश

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