साहित्य

चलते रहो तो सफर बहुत आसान हो जाता है

एस के कपूर"श्री हंस"

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चलते रहो तो सफर बहुत आसान हो जाता है।
जीवन की हर मुश्किल का समाधान हो जाता है।।
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जब पतझड़ आता तो फिर बसंत भी आता है।
हर कठनाई का एक समय पर अंत भी आता है।।
आत्मविश्वास है तो जीवन वरदान हो जाता है।
चलते रहो तो सफर बहुत आसान हो जाता है।।
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कठिनाई में धैर्य सुख में विनम्रता को न भूलना।
यह दोनों ही क्षण परीक्षा के लिए हैं मत चूकना।।
कोशिश करें तो आंतरिकशक्ति देख हैरान हो जाता है।
चलते रहो तो सफर बहुत आसान हो जाता है।।
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अपयश नहीं हार -जीत की पहली सीढ़ी होती है।
यही तो हमारे भीतर जीतने का जोश जज्बा बोती है।।
यदि हारके रुक गए तो हौसलों का नुकसान हो जाता है।
चलते रहो तो सफर बहुत आसान हो जाता है।।
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वही देखते हैं इंद्र धनुष को जो भी वर्षा में भीगते हैं।
जो रखते धैर्य को वो फिर हारते-हारते भी जीतते हैं।।
जो पत्थर तराशा जाता चोटों से वो भगवान हो जाता है।।
चलते रहो तो सफर बहुत आसान हो जाता है।।
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।।एस के कपूर”श्री हंस”
बरेली।।

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