
आया वसंत फिर से हे सखी मन में उमंग फिर जागी है,
फैली सुगंध चहुँ ओर सखी प्रकृति जैसे आल्हादित है।
आया वसंत….
नवरस ऋतु वसंत की आयी वन उपवन हरियाली छाई,
बीता पतझड़ कोंपल फूटी तरुओं ने तरुणाई पाई,
महकी कलियां फूले प्रसून शोभा अंनत जग छाई है।
आया वसंत….
पीली पीली सरसों फूली अमराई पर बौरें झूली,
कोकिल ने छेड़ी मधुर तान भ्रमरों ने गाया नया गान,
लिपटी लतिकाएँ तरुओं संग मन में उत्साह जगाती है।
आया वसंत….
ओढ़े चुनरी रंग वासन्ती मृदु अंगड़ाई है धरा भरती,
मधुमास मनाए जीव जगत तन वासन्ती मन वासन्ती,
बह रहा पवन लेकर सुगंध फागुन सी मस्ती छाती है।
आया वसंत….
©® सुमन पंत सुरभि
हरिद्वार



