साहित्य

शिव-स्तुति

सुषमा श्रीवास्तव

नंदी की सवारी करें,
कैलाश पर विराजें हैं,
गंग जटा धारी हैं,
मृग छाला वसनधारी हैं,
शिव जग में अवतारी हैं।

गजानन से सुत जिनके,
भाँग,धतूरा , बेलपत्र साजे,
रक्त चंदन मस्तक राजे,
बेर मिष्ठान भोग लागे,
देह-भस्म धारी हैं।

गौरा सी पुजारन पाएं,
दुग्ध-जलाभिषेक होवे
घंटा आरती भक्त धुन गूँजे,
बम-भोले जयकारे लागें,
सारे जग के निहारी हैं।

फाल्गुन-कृष्ण, त्रयोदशी,
सब भक्त रहें निराहारी,
पूजन,वंदन संग भजन करें
भक्ति भाव से झूमें – नाचें,
अर्ध रात्रि शिवा संग ब्याह रचावें,
सब उनके ही पुजारी हैं।

महाशिवरात्रि की रात कहावे,
चेतनता की महिमा पावें,
लोक-कल्याण के भाव को लेकर,
न्याय-अन्याय विचारी हैं,
ऐसे भोले बाबा के जुहारी हैं।
हम भक्तों की भीड़ भारी है।।

सुषमा श्रीवास्तव,
रूद्रपुर, ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!