साहित्य

जीवन की मैराथन

डॉ. मंजु गुप्ता

बिस्तर से उठकर मैंने चलने की कोशिश की, पर चल नहीं पाई। ठंडी साँस लेकर फिर लेट गई। अब तो सब डॉक्टर के भरोसे है। आज घुटनों का ऑपरेशन है।

मैं भीतर ही भीतर डर रही थी।

तभी पति देव ने मेरे कँधे पर हाथ रख कहा था – “सब ठीक होगा।”

मेरे भीतर प्रार्थना चलने लगी।

 

*18 दिसंबर 2023*

 

रात के दस बज रहे हैं। बीच के दो दिन खाली निकल गए। लिख नहीं पाई।

 

16 दिसंबर को तयशुदा वक्त यानी साढ़े दस बजे मेरी घुटने की सर्जरी होने वाली थी। मन में भय भी था। नर्स सफेद ढीला गाउन , पाजामा पहनाकर, स्ट्रेचर पर ऑपरेशन थियेटर में ले गयी थी।

 

वहाँ क्या-क्या कैसे किया गया, मैं कब वार्ड के बिस्तर पर आ गई, वह सब मेरी चेतना में नहीं था। धीरे -धीरे मुझ में चेतना आयी। पतिदेव जी मुझे देख रहे थे पेट से नीचे पेल्विक रीजन से पैर तक चेतना नहीं आयी।

 

*19 दिसंबर 2023*

 

टाँगें सूज कर भारी हो गयी हैं।

आज बर्फ के पेड से पूरी टाँगों की सिंकाई की गयी। सिस्टर्स ने मुस्कुराते हुए एक माँ से भी ज्यादा सेवा की। उनकी सेवा का ऋण मैं नहीं चुका सकती हूँ। ईश के दूत बने थे डॉक्टर। सब ठीक होने लगा है।

 

*21 दिसंबर 2023*

 

कल बीस तारीख का दिन खाली चला गया। दर्द की वजह से कुछ लिख न पाई। आज तबियत ठीक है। फीजियोथेरेपिस्ट आया था। एक्सरसाइज करवायी। वॉकर से चलना सिखाया गया।

आत्मविश्वास जाग रहा है।

 

 

*31 दिसंबर 2023*

 

23 दिसंबर को डिस्चार्ज का दिन था।

पतिदेव मेरे पास थे और सारे डॉक्टरी परामर्श , प्रिस्क्रिप्शन, दवाईयाँ थीं। हम अपने चेहरे पर स्वास्थ्य की मुस्कान लिए, दोपहर दो बजे हॉस्पिटल से घर आ गए।

मैं दूसरों पर आश्रित नहीं रहूँगी। यह अनुभूति नव- उमंग भर रही है।

 

सर्जरी की आधुनिक तकनीक से मुझे नया जीवन, नयी ऊर्जा, नयी गतिशीलता मिली । मुझे लग रहा है कि नए वर्ष में, मैं मुंबई की मैराथन में भाग ले सकूॅंगी।

 

*- डॉ. मंजु गुप्ता*, वाशी , नवी मुंबई

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