
कुकर्म तुम्हें कभी ना बचा पायेगा
नरक की कोठरी तक ले जायेगा
लाख करो तुम दिखावे की हवन
मंदिर में कर ले लाख झुठी भजन
धन दौलत संग ना साथ जायेगा
लुट का धन जब तुम घर लायेगा
रोयेगा तेरा भी मुरझाया चमन
जल जाती है। तन की भी कफन
दीन हीन को जब कोई रूलायेगा
दर्द की अश्क उनके घर पे जायेगा
कर लो तुम चाहे कोई भी जतन
बद्दुआ से हो जाती है पापी की पतन
साधु जन पे जब भी राौब दिखलायेगा
हनक पे तुम भी एक दिन पछतायेगा
काम ना आयेगा राधा मोहन की भजन
कुकर्म की सजा पायेगा तुम भी सनम
रब ने दी है समता का सबको अधिकार
धर्मनीति से चलती है ये पावन संसार
पापों से उजड़ जाता है हँसता गुलशन
आँखें खुल जायेगी जब रौद्र हो पवन
उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बांका बिहार



