साहित्य

शिवरात्रि

किरण कुमारी 'वर्तनी'

चले भक्त शिवरात्रि में, शिव गौरा के द्वार।
बम -बम भोले बोलकर, जीवन लेते तार।।

दूर-दूर से चलकर आते।
भोले को जल भक्त चढ़ाते
।।
महाशिवरात्रि ज्यों ही आये।
भक्तों का रेला सज जाये।।

मंदिर में गूंजे जयकारे।
भीड़ दिखे है नदी किनारे ।
कोई बेल पत्र ले आए।
कोई सच्चा भाव दिखाए।।

मग्न हुए हैं जपकर भोले ।
भक्ति भाव रस उर में घोले।।
पावन फागुन मास सुहाता।
पाप हृदय का है धुल जाता।।

चलो शिवालय माथा टेको।
मन का सारा कचरा फेंको।।
रोग रहित जीवन पाओगे।
घर में खुशियांँ भर लाओगे।।

शिव पारो है खेवनहारे।
जीवन बगियाँ यही सँवारे।।
शक्ति शिवा की अब पहचानो।
भटक नही इत- उतअनजानो ।।

लगे नहीं यह रात घनेरी।
जपलो शिव कर मत अब देरी ।
दुख की बदली छँट जाएगी।
धूप सुहावन खिल आएगी।।

गौरा का फाल्गुन में , शिव से हुआ विवाह।
रुद्र मिले पति रूप में, पारो की थी चाह।।

किरण कुमारी ‘वर्तनी’ जमशेदपुर

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