
धर्म के अनुसार सदाचरण हो,
ऐसे पुरुषार्थ से अर्जित धन हो,
ऐसे धन से यज्ञ किया गया है,
तो यज्ञ का पुण्यफल सफल है।
मनुष्य को काम, क्रोध और लोभ
के मोह कर्तव्य से विमुख करते हैं,
ऐसे व्यक्ति पद, अधिकार पाकर,
पथभ्रष्ट हो भ्रष्ट आचरण करते हैं।
कर्तव्यनिष्ठता के कर्म का ज्ञान,
कर्तव्य पालन के धर्म का भान,
पुरुषार्थ से ही परमार्थ की प्राप्ति,
इस सद्प्रवृत्ति से सफल हर व्यक्ति।
कर्तव्यबोध स्वभाव सरल रखता है,
उद्देश्य प्राप्ति हेतु पुरुषार्थ करता है,
ऐसे कर्मशील व्यक्ति के लिये राहें,
आसान, सफलता की प्राप्ति होती है।
आदित्य इंसान का सदाचरण ही,
इंसान की प्रकृति और प्रवृत्ति का
द्योतक होता है आभास कराता है,
ऐसे व्यक्ति के साथ ईश्वर होता है।
विद्यावाचस्पति डा० कर्नल
आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ



