साहित्य

घर

विनोद कुमार सीताराम दुबे

घर चारदीवारी से घीरा
संगमरमर से सजा-धजा
बेहतरीन रंगों से सराबोर
अनूठी डिजाइनों से सजा
रंग-बिरंगी लाइटों से सजा
तब और अच्छा लगेगा भाई
जब उसमें रहने वाले खुश हों
घर का परिवार हंसता रहे
तो घर को सजाने की जरूरत नहीं
वह अपने परिवार की एकता
भाईचारे और आदर सम्मान से
सदैव चमकता रहेगा प्यारे
घर अपने परिवार से संबोधित
किया जाएगा भाई
घर की चाह रहती है कि
घर घर नहीं एक मंदिर बने
मानवता की पहचान बने
पारिवारिक जीवन का स्वर्ग बने

विनोद कुमार सीताराम दुबे ‌णशिक्षक भांडुप मुंबई महाराष्ट्र
संस्थापक इन्द्रजीत पुस्तकालय सीताराम ग्रामीण साहित्य परिषद सामवन्ती ग्राम महिला विकास मंडल जुडपुर मड़ियाहूं जौनपुर उत्तर प्रदेश

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