
भगोरिया पर्व पर
दस्तक देती वह
भिलालन
मस्ती उमंग ओर उन्मुक्तता
का अहसास कराती हुई
प्रसन्न हो जीने का अद्भुत
संदेश देती चली आती हैं
शहर का चकाचौंध में
शहर को पाठ पढ़ाने
जीवन की परिभाषा ले
मस्ती और और खुशहाली

का नाम जिंदगी है
हालत कैसे भी हो
फिर भूखों तो भूखों
सुखलो तो सही
अर्थात भले भूखे सोते हैं
भूखे उठते हैं
पर सुखी तो है
कमाल का अद्भुत सुखद
संदेश आज में जीने का
सन्देश देती
भगोरिया पर्व पर
गुनगुनाती हुई
मस्त मौला चाल में
ठुमकती हुई
बेहद सुंदर शुभ यादगार पल को
सभी के लिए
सदा ही स्मरणीय रखती
सचमुच बेहद सार्थक है
उसकी उपस्थिति
जो जिन्दा कर जाती हैं और
हर हाल में खुश रहने का
अहसास कराती हुई
प्रेरणा स्रोत बन जाते है
धन्य धरा झाबुआ
जो जीवन की परिभाषा
सार्थक करता है
श्रम और आत्मा विश्वास को
जागृत कर
सदा ही क्रम शील का अहसास करता है और लाखों को
प्रेरित कर
अपनी उपस्थिति को
सार्थक करती है
वह भोली भाली
मेरे गांव की भिलालन
भगोरिया की अनोखी
यादें को मस्ती को
सदा के लिए
पलकों में कैद कर
इंसान जीने की अद्भुत
परिभाषा समेट
चल देता है
सदा ही उस पर
अमल करते हुए
जीने को
डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश


