
अच्छे कर्मों से ही मानव, अपनी पहचान बनाना।
परहित की हो भरी भावना, वंचित को गले लगाना।।
विश्व पटल पर गूँज रहा है, भारत माँ का गान सदा।
सत्य सनातन के अनुयायी, बढ़ा रहे हैं मान सदा।।
हम सबको भी मिल करके अब,मांँ की है आन बचाना।
अच्छे कर्मों———
गंगा-यमुना पावन सलिला, शाश्वत धारा बहती हैं।
मोक्ष प्रदायिनि की लहरें भी, कल-कल में कुछ कहती हैं।।
अपमान किसी का तुम मत करना,गिरे हुए को सदा उठाना।
अच्छे कर्मों से——–
शौर्य पराक्रम को कर जागृति,कायम मिसाल है करना।
दूरदर्शिता लक्ष्य साधना,देश प्रेम उर में भरना।।
आँच देश पर जब भी आए, दुश्मन को मार भगाना।
अच्छे कर्मों—-
राम-कृष्ण का प्यारा भारत, अप्रतिम सभ्यता है बसती।
खग वृंद जहाँ कलरव करते, प्रकृति अनूठी है सजती।।
विश्व गुरु कहलाए भारत, श्रद्धा का भाव जगाना।
अच्छे कर्मों —-
उनको सदा प्रणाम हमारा, फाँसी फंदा जो चूमे।
भारत माँ की रक्षा हित वो, अपनी मस्ती में झूमे।
उनकी रखें संँजोकर थाती, जग में है शान बढ़ाना।
अच्छे कर्मों ——
डॉ गीता पांडेय अपराजिता
रायबरेली उत्तर प्रदेश




