स्वाभिमान साहित्यिक मंच का 42वां राष्ट्रीय कवि दरबार: हिन्दी और पंजाबी रचनाओं का अद्भुत संगम
दुर्गेश मोहन

पटियाला: स्वाभिमान साहित्यिक मंच पटियाला द्वारा आयोजित 42वें राष्ट्रीय कवि दरबार ने साहित्य प्रेमियों को हिन्दी और पंजाबी रचनाओं के अद्भुत संसार में डुबो दिया। नरेश कुमार आष्टा की अध्यक्षता और संयोजकत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का सफल संचालन जागृति गौड़ पटियाला ने किया। भारत के विभिन्न राज्यों से आए साहित्यकारों ने अपनी कविताओं और ग़ज़लों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ जागृति गौड़ द्वारा प्रस्तुत मनमोहक “हे! शारदे मां” सरस्वती वंदना से हुआ। संतोष मालवीय राजगढ़ मध्यप्रदेश ने प्रेम रस से ओतप्रोत गीत ‘गीतों के सब अनुबंध तुम्हारे वास्ते’ सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी। नोएडा से ग़ज़लों के बादशाह विज्ञान व्रत जी ने अपनी ग़ज़ल ‘गुमसुम भी रह पाना मुश्किल’ से महफिल लूट ली।
नंदकुमार आदित्य जी ने ‘जिन्दगी के सफ़र में’ रचना से सभी की आत्मा को विभोर किया, वहीं सुरेंद्र कुमार अरोड़ा साहिबाबाद ने प्यार भरा गीत ‘जीवन का सार हो तुम’ से श्रोताओं को रोमांचित किया। रांची से निर्मला कर्ण ने चौपाई ‘नील गगन की सैर करूंगी’ से अपनी हाज़री लगवाई। भागलपुर से सच्चिदानंद किरण ने होली गीत सुनाकर महफ़िल को रंगीन बना दिया। सोनल ओमर राजकोट गुजरात से ने ‘एक असावधानी पर चली जाती है जान प्यारी’ कविता से सुरक्षा और सावधानी का संदेश दिया।
पटियाला से प्रो. नव संगीत सिंह जी ने पंजाबी रचना ‘मत्थे च चीनक आउनी’ सुनाकर कवि दरबार को एक नई दुनिया में ले गए और महापुरुषों के वचनों से सभी को प्रेरित किया। नई दिल्ली से संतोष पुरी जी ने भक्ति रचना ‘ज़ब चारों ओर अँधियारा हो, आशा का दूर किनारा हो’ सुनाकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। सागर मध्य प्रदेश से दिव्यांजलि सोनी दिव्या ने होली पर शानदार कविता ‘रंगों से खेलें भरें आशा गली में, दिल बना पौड़ी’ सुनाकर सभी का दिल जीत लिया। डॉ. अनुज प्रभात ने अपनी ग़ज़ल ‘अच्छे दिनों की बात तो सभी करते हैं’ से समाज की विसंगतियों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का सफल संचालन कर रही जागृति गौड़ जी ने एक से बढ़कर एक शेर सुनाये और इश्क की चाशनी से भरी रचना ‘सच है कि निभाना पड़ता है, कभी कभी इश्क भी जताना पड़ता है’ से सभी को आत्मविभोर कर दिया। उनके संचालन और काव्य प्रस्तुति ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। अंत में, कार्यक्रम के अध्यक्ष नरेश कुमार आष्टा ने सभी रचनाकारों की रचनाओं की संक्षिप्त समीक्षा की और सभी का धन्यवाद किया। यह कार्यक्रम स्वाभिमान साहित्य यूट्यूब चैनल पर लाइव प्रसारित किया गया, जिसे सैकड़ों दर्शकों ने बड़ी शिद्दत से देखा और सराहा। यह कवि दरबार एक मीठी याद बन गया, जिसने साहित्य और कला के प्रति प्रेम को और गहरा किया, साथ ही नये और वरिष्ठ कवियों को एक मंच पर लाकर विचारों और भावनाओं का अद्भुत आदान-प्रदान किया।
प्रस्तुति_ दुर्गेश मोहन
बिहटा, पटना (बिहार)



