
दादा जी ऐसा क्यों कहते,
गई भैंस पानी में,
जानबूझकर इसको कहते
या फिर नादानी में।
दादा बोले किसी काम को
पूरा श्रम हम देते,
भरसक कोशिश करने पर भी
लाभ नहीं कुछ लेते।
प्रयत्न व्यर्थ देखकर सारे
कहते हैं हैरानी में,
अब तो आशा छोड़ो भैया
गई भैंस पानी में।
मुकेश कुमार दीक्षित ‘शिवांश’
चंदौसी
मो ०- 8433013409



