
ख्वाबों की तुम हो मेरे दिल की पटरानी
हकीकत की दुनियाँ में बन जा प्रेम कहानी
मैं तुमसे अपनी प्यार का करता हूँ इजहार
मेहबूब मेरे ना करना मेरे प्रेम का इनकार
पाँव में तेरी चाँदी की पायलिया बना लाऊँ
तेरे सूनी माँग में प्रीत की लाली सजा दूँ
प्रेम पर्वत की तुम बन जाना प्यार की बहार
कोरे कागज पे करा ले तुम हमसे इकरार
कहार संग तेरे दर पे पालकी लेकर आ जाऊँ
गहनों में सजा तुम्हें दुल्हनियां बना दिखलाऊँ
अग्नि के चारों ओर करा लो अब फैरें हजार
मेरी मोहब्बत की आरजू हो सनम स्वीकार
कोई गम जीवन में पास कभी ना आ पाये
तेरे प्यार की खुशबू मेरे घर आँगन महकाये
कर लेना मेरे हमदम तुम मेरे नाम की श्रृंगार
डाल दो मेरे गले में अब प्रेम प्रीत की ये हार
तेरे बिना ये रात सूनी सुनी सी है अंधियारी
तन्हा की काली अमावश है यहाँ बड़ी भारी
कर दो मेरी सूनी जीवन को अब उजियार
मेरे मन की आरजू को तुम कर दो साकार
उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बांका बिहार



