
कोमल है कमजोर नहीं शक्ति का नारी नाम है,
जग को रोशन करने वाली ये सुबह की पहली शाम है।
ममता त्याग की मूरत नारी, सहनशीलता की खान है,
हर घर की ये रौनक बनती हर आंगन की ये शान है।
सपनों को परवाज़ दे रही, अब छूती ऊंचा आसमान,
नारी के बिना सुना है जग ये ही सृष्टि का वरदान।
नारी के आंचल में सिमटा, ये सारा संसार है,
इसकी ममता और शक्ति ही जग का सच्चा सार है।
लिखता है “आकाश” जब यहां नारी के साहस की गाथा,
भारत के जन-जन का झुकता नारी के सम्मान में माथा।
पंडित मुल्क राज “आकाश”
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश




