
दिल की बातें दिल ही में
रहने दो ना
हमारी वह मुलाकातें वहीं
रहने दो ना!!
क्यों हमारा रिश्ता मक़बूल
ना हुआ
क्या हुआ यह कहानी
रहने दो ना!!
अभी तलक भी याद है मुझको
तुम्हारे साथ के मंज़र
सुबह से शाम की बाते
अब रहने दो ना!!
बनावट भी ज़रूरी है
बनावटी लोगों के सामने
है नादानी अगर
तो नादानी रहने दो ना!!
क्यों लाते हो लोगों के सामने
कहानी को कहानी
रहने दो ना…!!
स्वरचित- राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान




