
ऋतुओं का अनुपम चक्र प्रकृति का सुंदर उपहार,
छह ऋतुओं से सजता जग, बदलता हर बार।
वसंत ऋतु में फूल खिलें, हरियाली मुस्काए,
मधुर पवन के संग-संग, जीवन रस बरसाए।
ग्रीष्म तपन लिए आए, सूर्य प्रखर मुस्काए,
फल मीठे आमों के देकर, तन-मन तृप्त बनाए।
वर्षा रिमझिम जल बरसाए, धरती प्यास बुझाए,
सूखी धरती हरी भरी हो, जीवन नव अंकुर लाए।
शरद स्वच्छ गगन लहराए, चाँदनी मधुर बिखेरे,
शीतल उजली रातों में, मन के तम सब घेरे।
हेमंत हल्की ठंडक लाए, खेतों में लहराए धान,
स्वस्थ तन-मन कर देती, देती सुख का दान।
शिशिर ठिठुरन लेकर आए, ओस मोती बन जाए,
प्रकृति विश्राम कर फिर से, नव सृजन को आए।
ऋतुओं का यह चक्र सिखाए, जीवन का विस्तार,
हर परिवर्तन में छिपा है, नव सृजन का सार।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार



