धामी कैबिनेट का विस्तार : हरिद्वार को मिला प्रतिनिधित्व, पाँच नए मंत्रियों ने ली शपथ
डाॅ.शिवेश्वर दत्त पाण्डेय

देहरादून। लंबे समय से चल रही अटकलों और चर्चाओं पर विराम लगाते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आखिरकार अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया। नवरात्र के पावन अवसर पर हुए इस बहुप्रतीक्षित विस्तार में पाँच नए चेहरों को मंत्रिपद की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिससे न केवल राजनीतिक संतुलन साधने का प्रयास किया गया, बल्कि क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को भी प्राथमिकता दी गई।
राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल) ने क्रमशः राजपुर विधायक खजान दास, भरत सिंह चौधरी, हरिद्वार से विधायक मदन कौशिक, रुड़की के विधायक प्रदीप बत्रा और राम सिंह कैड़ा को मंत्रिपद की शपथ दिलाई। इस अवसर पर सरकार और संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।
इस कैबिनेट विस्तार की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि हरिद्वार जिले को चार वर्षों के बाद मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ। मदन कौशिक और प्रदीप बत्रा को मंत्री बनाए जाने से क्षेत्रीय असंतुलन की लंबे समय से उठ रही मांग को संबोधित करने का प्रयास माना जा रहा है। इससे हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों के विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
कार्यक्रम की शुरुआत सबसे पहले खजान दास के शपथ ग्रहण से हुई। इसके पश्चात भरत सिंह चौधरी ने संस्कृत में शपथ लेकर परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों का संदेश दिया। इसके बाद क्रमशः मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा और राम सिंह कैड़ा ने भी मंत्री पद की शपथ ली। सभी मंत्रियों ने अपने-अपने दायित्वों को निष्ठा और ईमानदारी से निभाने का संकल्प व्यक्त किया।
राजनीतिक दृष्टि से यह विस्तार काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में पिछले काफी समय से कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज थीं। वर्तमान में मंत्रिमंडल में पाँच पद रिक्त थे, जिन्हें अब भर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, नए मंत्रियों के चयन में उनके पिछले चार वर्षों के कार्यों, संगठन में उनकी भूमिका और क्षेत्रीय प्रभाव को प्रमुख आधार बनाया गया है।
इसके साथ ही, इस विस्तार में क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों के बीच संतुलन स्थापित करने की स्पष्ट कोशिश दिखाई देती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है, जिससे सरकार को संगठनात्मक मजबूती भी मिल सके।
कैबिनेट विस्तार को लेकर राज्य सरकार और केंद्रीय नेतृत्व के बीच कई दौर की चर्चाएं हो चुकी थीं। सभी पहलुओं पर सहमति बनने के बाद नवरात्र के शुभ अवसर को इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए चुना गया, जिससे इसे एक सकारात्मक और शुभ संदेश के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए मंत्री अपने-अपने विभागों में किस प्रकार की कार्यशैली अपनाते हैं और राज्य के विकास को गति देने में कितने प्रभावी साबित होते हैं। फिलहाल, इस विस्तार से सरकार ने राजनीतिक संतुलन साधने के साथ-साथ जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास अवश्य किया है।




